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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, Verse 20

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

शास्त्रयत्नविचारेभ्यो मूर्खाणां प्रपलायिनाम् । कल्पिता वैष्णवी भक्तिः प्रवृत्त्यर्थं शुभस्थितौ ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

यदि अपने प्रयत्न से उत्पन्न विचार से ही ज्ञान उदय होता है, तो शास्त्रों में विष्णु भगवान्‌ की आराधना का विधान किसलिए है ? ऐसी कोई शंका करे, तो उस पर कहते हैं। विषयों मेँ आसक्ति की प्रबलता के कारण अध्यात्मशास्त्रों से, इन्द्रियजय आदि प्रयत्नों से और विचारों से दूर भागनेवाले मूर्खो की कथंचित्‌ शुभ मार्ग में प्रवृत्ति के लिए विष्णु की भक्ति की कल्पना की गई हे