Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, Verse 21
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
अभ्यासयत्नौ प्रथमं मुख्यो विधिरुदाहृतः ।
तदभावे तु गौणः स्यात्पूज्यपूजामयक्रमः ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
पूर्वोक्त अर्थ को युक्तयो से दृढ़ करते हैं।
शास्त्र में अभ्यास और प्रयत्न पहले मुख्य विधि कही गई है । उनके अभाव में पूज्य पूजारूप विधि
गौण हे