Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
आराधयात्मनात्मानमात्मनात्मानमर्चय ।
आत्मनात्मानमालोक्य संतिष्ठस्वात्मनात्मनि ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
हे वत्स, तुम अपने आत्मा को यह उत्कृष्ट है, यह समझकर श्रवण आदि से अपने-आप
सिद्ध करो तथा सिद्ध हुए उसका अपने-आप निरन्तर अनुसन्धान द्वारा पूजन करो, अपने आत्मा का
अपने आप तत्त्वतः साक्षात्कार कर उसीमें अपने-आप भली भाँति स्थित होओ