Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, Verse 18
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
अभ्यासवैराग्ययुतादाक्रान्तेन्द्रियपन्नगात् ।
नात्मनः प्राप्यते यत्तत्प्राप्यते न जगत्त्रयात् ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
अभ्यास और वैराग्य से युक्त आत्मा से जिसने इन्द्रियरूपी साँपों को अपने वश में कर
लिया है, उससे जो परम पुरुषार्थ प्राप्त किया जा सकता है, वह तीनों जगतों से भी प्राप्त नहीं किया जा
सकता