Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, Verse 17
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, verse 17 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
न हरेर्न गुरोर्नार्थात्किंचिदासाद्यते महत् ।
आक्रान्तमनसः स्वस्माद्यदासादितमात्मनः ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
ज्ञान की दृढ़ता से बाधित मनवाले अपने आत्मा से जो परमपुरुषार्थरूप परमपद प्राप्त किया गया,
वह न तो भगवान् विष्णु से कुछ प्राप्त किया जा सकता है, न गुरु से और न धन से ही प्राप्त किया जा
सकता है