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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, Verse 16

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 16

संस्कृत श्लोक

गुरुश्चेदुद्धरत्यज्ञमात्मीयात्पौरुषादृते । उष्ट्रं दान्तं बलीवर्दं तत्कस्मान्नोद्धरत्यसौ ॥ १६ ॥

हिन्दी अर्थ

गुरुजी शिष्य के प्रयत्न के बिना ही शक्तिपात आदि द्वारा शिष्य का उद्धार करते हैं यह योगशास्त्र आदि में प्रसिद्ध है, इसमें व्यभिचार आयेगा, ऐसी शंका होने पर कहते हैं। अपना पौरुष किये बिना यदि गुरु अज्ञानी का उद्धार करते हैं, तो ऊँट अथवा बैल का उद्धार क्यों नहीं करते हे ? गुरुभक्ति आदि प्रयत्न ही वहाँ पर भी ज्ञानोत्पत्ति में गुरुकृपा को द्वार बनाते हैं, यह भाव है