Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, Verse 15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
विना पुरुषयत्नेन दृश्यते चेज्जनार्दनः ।
मृगपक्षिगणं कस्मात्तदासौ नोद्धरत्यजः ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि
पौरुष प्रयत्न के बिना भगवान् विष्णु का दर्शन हो, तो ये भगवान् मृग और पक्षियों का क्यों नहीं उद्धार
करते यानी आत्मतत्त्व का साक्षात्कार क्यों नहीं कराते ?