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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 41, Verse 11

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 41, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 41 · श्लोक 11

संस्कृत श्लोक

देहाभावे न दुःखानि देहे दुःखानि मे मतिः । इति चिन्ताविषव्याली मूर्खमेवावलुम्पति ॥ ११ ॥

हिन्दी अर्थ

वैराग्य के समाधिकारण होने पर रागयुक्त देह में भी दुःख हेतुत्व का अनुभव होगा, अतः उसका त्याग भी समाधि में निमित्त होगा, वह भी अज्ञानियों का ही अभीष्ट है मेरा अभीष्ट नहीं है, ऐसा कहते हैं। देह का अभाव होने पर दुःख नहीं रहते, देह में दुःख रहते हैं, इस प्रकार चिन्तारूपी विषैली नागिन मूर्ख को ही डैंसती है, ऐसा मेरा विश्वास है