Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 41, Verse 12
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 41, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 41 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
इदं सुखमिदं दुःखमिदं नास्तीदमस्ति मे ।
इति दोलायितं चेतो मूढमेव न पण्डितम् ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए सुख प्राप्ति की इच्छा से अथवा दुःखनिवृत्ति की इच्छा से मैंने समाधि नहीं ली, ऐसा
कहते हैं ।
यह सुख है, यह दुःख है, यह मेरा है और यह मेरा नहीं है इस प्रकार दोलायमान चित्त मूढ़ को ही
नष्ट करता है, पण्डित (ज्ञानी) को नहीं