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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 40, Verse 7

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 40, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

सर्वदा सर्वमेवासि चित्प्रकाशः परैकधीः । को देहः कोऽप्यदेहस्ते यं गृह्णासि जहासि च ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि अज्ञानी भी देह में रह कर देही है, तो स्पर्श के संवेदन से देह में स्थित मैं देही क्यो न रहूँगा ? इस पर कहते हैं। प्रकाशक होने के कारण तुम्हारी सब वस्तुओ में स्थिति तुल्य हे, इसलिए एकमात्र परमात्मा में बुद्धिवृत्तिवाले प्रकाशस्वरूप तुम सब कुछ हो, अज्ञानी के समान देह मात्र नहीं हो । कौन वस्तु तुम्हारी देह होगी, जिसका कि तुम अहंबुद्धि से ग्रहण करो ओर अदेह भी कौन होगी, जिसका कि तुम अनहंबुद्धि से त्याग करो