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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 40, Verse 6

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 40, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

प्रबुद्धो ज्ञातवस्तुत्वाद्देहः क्व शमिनामिह । इदं त्वेकं परिच्छिन्नं रूपमज्ञेषु दुःस्थितम् ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि प्रह्लाद पूछे कि मेरी अदेहता कैसे ? तो इस पर कहते हैं। तुम्हे तत्त्वज्ञान हो चुका हे, अतएव तुम प्रबुद्ध हो गये हो, बोध होने पर सर्वद्वैत से रहित पुरुषों का शरीर यहाँ कहाँ रहता है, स्वप्न की निवृत्ति होने पर स्वप्न शरीर नहीं रहता । यह एक परिच्छिन्न देहरूप यद्यपि असंभाव्य है तथा अज्ञानियों में ही स्थित है