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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 4, Verse 1

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 4, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 4 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीवाल्मीकिरुवाच । मेघगम्भीरया वाचा विश्रब्धपदसुन्दरम् । इदं दशरथो वाक्यमुवाच मुनिनायकम् ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीवाल्मीकिजी ने कहा : वत्स, राजा दशरथ ने मेघ के गर्जन के तुल्य गंभीर वाणी से यह उनके उपदेश में अत्यन्त विश्वास प्रकट करनेवाली पदावलियों से सुन्दर निम्ननिर्दिष्ट वचन मुनिश्रेष्ठ श्रीवसिष्ठजी से कहा

सर्ग सन्दर्भ

तीसरा सर्ग समाप्त चौथा सर्ग राजा दशरथजी का श्रीवसिष्ठजी के वाक्यों की प्रशंसा करना तथा श्रीवसिष्ठजी के वचन से श्रीरामचन्द्रजी द्वारा चिन्तित पदार्थो का अनुवाद |