Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
वायुर्वहति नोन्मत्तस्त्रिलोकीभस्मधूसरः ।
लोलामरकपालाङ्कस्तनुं त्यजसि किं मुधा ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
अभी तीनों लोकों की राख से धूसर तथा देवताओं की चंचल खोपड़ियाँ जिसकी चिहभूत
हैं, ऐसी प्रलयकालीन प्रखर वायु नहीं बहती है, तुम क्यो शरीर को छोड़ते हो ?