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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, Verse 30

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, verse 30 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 30

संस्कृत श्लोक

अशोक इव मञ्जर्यः पुष्करावर्तविद्युतः । न स्फुरन्ति जगत्कोशे तनुं त्यजसि किं मुधा ॥ ३० ॥

हिन्दी अर्थ

अशोक के वृक्षों पर मंजरियों की नाई इस समय ब्रह्माण्ड में पुष्करावर्तनामक प्रलयकालीन मेघों पर बिजलियाँ नहीं चमकती हैँ फिर तुम व्यर्थ क्यों शरीर का त्याग करते हो ?