Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, Verse 28
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
नोदिता द्वादशादित्या न प्रलीनाः शिलोच्चयाः ।
न जगज्ज्वलितं साधो तनुं त्यजसि किं मुधा ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
तो क्या कल्पान्त निकट है 2 ऐसी आशंका होने पर नहीं, ऐसा कहते है।
हे सज्जनशिरोमणे, अभी प्रलयकाल में उदित होनेवाले बारह सूर्य उदित नहीं हुऐ है, हिमालय
आदि पर्वत मटियामेट नहीं हुए हैं और जगत् जला नहीं है, तुम व्यर्थ क्यो शरीर का त्याग करते
हो ?