Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, Verse 27
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, verse 27 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
कल्पान्तस्थायिनी शुद्धा दृष्टलोकपरावरा ।
इयं तव तनुर्जाता जीवन्मुक्तविलासिनी ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
तुम्हारा यह शरीर, जो कल्पान्त तक रहनेवाला है, लोक के विविध व्यवहारो को
देख चुका है ओर जीवन्मुक्ति से सुशोभित है, शुद्ध हो गया है