Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, Verse 22
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, verse 22 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
साधो स्मर महालक्ष्मीमात्मीयां स्मर चाकृतिम् ।
अकाण्ड एव किं देहविरामः क्रियते त्वया ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
“हे साधो, तुम
महती दैत्यराज्यश्री का और अपनी आकृति का स्मरण करो। तुम देह के विस्मरण से अनवसर में ही देह
का अवसान किसलिए करते हो ?