Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, Verse 21
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
प्रफुल्लनयनं जातमननं पीवरस्मृतिम् ।
उवाचैनं त्रिलोकेशः पुरा नाभ्यब्जजं यथा ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
त्रिलोकाधिपति भगवान् कल्प के आदि
में जैसे नाभिकमल स उत्पन्न ब्रह्मा से कहते हैं वैसे ही प्रफुल्लनयन प्रह्लाद से, जिसे मैं प्रहा हूँ, यह
प्रत्यभिज्ञा हो चुकी थी ओर जिसकी पूर्वावस्था की स्मृति दृढ़ हो चुकी थी, कहा