Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
हेयोपादेयसंकल्पविहीनस्य शरीरगैः ।
भावाभावैस्तवार्थः किमुत्तिष्ठोत्तिष्ठ संप्रति ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि - ~न वै सशरीरस्यप्रियाप्रिययोरपह॒तिरस्ति” (सशरीर पुरुष के इष्ट ओर अनिष्ट का विनाश
नहीं होता) इस श्रुति से तथा सब लोगों के अनुभव से देह का स्मरण अनर्थका कारण है, ऐसी शका हो,
तो उस पर कहते है ।
हेयोपादेय के संकल्प से रहित तुम्हारे शरीर में स्थित प्रिय आरे अप्रिय से क्या प्रयोजन है, इसलिए
तुम इस समय अवश्य उठो । भाव यह कि हेयोपादेय संकल्प का त्याग होने से देह के रहने पर भी प्रिय
ओर अप्रिय से तुम्हें कोई अनर्थ की प्राप्ति नहीं होगी