Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 38, Verse 9
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 38, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 38 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
मोक्षाख्यं निर्गतद्वन्द्वं ततो यास्यति तत्पदम् ।
क्षीणाभिमानविरसा लतेव प्रविशुष्कताम् ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे जल से रहित लता शुष्कता को प्राप्त होती है वैसे ही अभिमानशून्य होने के कारण
स्वर्ग सुख से विमुख देवता रागद्वेष के अभावरूप शम से शीत-उष्ण आदि द्वन्द्रौ के उपद्रव से रहित
मोक्ष नामक उस परमपद को प्राप्त होंगे