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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 38, Verse 8

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 38, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 38 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

दैत्याभावे सुरश्रेणी निर्जिगीषुपदं गता । शममेष्यत्यदृष्टाब्दपटलेषु सरिद्यथा ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

दैत्यों के न रहने पर प्रतिस्पर्धा से रहित पद को प्राप्त हुए देववृन्द जैसे अनावृष्टि के समय में नदी सूख जाती है वैसे ही रागद्वेष रहित हो जायेंगे