Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 36, Verse 76
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 36, verse 76 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 36 · श्लोक 76
संस्कृत श्लोक
निरीहेण निरंशेन निरहंकृतिना त्वया ।
सता वाप्यसता वापि कर्तृत्वमुररीकृतम् ॥ ७६ ॥
हिन्दी अर्थ
आपकी अनन्तरूप और नामों की आस्पदता में कर्तत्वाध्यास ही मूल है, ऐसा कहते हैँ ।
चेष्टारहित, निरवयव, निरहंकार, मूर्त स्थूल देहोपाधिवाले अथवा अमूर्त सूक्ष्म देहोपाधिवाले
आपने कर्तृता का स्वीकार किया है