Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 35, Verse 88

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 35, verse 88 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 35 · श्लोक 88

संस्कृत श्लोक

दुरुत्तराः समविषमा महापदः सुदुःसहाः प्रभवनदीर्घदोषदाः । गताः क्षयं समधिगतो महेश्वरश्चिदद्वयोऽपगतमचित्त्वमन्तरे ॥ ८८ ॥

हिन्दी अर्थ

मन की शान्ति से ही सब आपत्तियों की निवृत्ति ओर निरतिशय आनन्दरूप आत्मा की प्राप्ति का निर्देश करते हुए उपसंहार करते है । विविध योनियों में जन्मपरम्पराओं ओर काम, लोभ, मोहादि दोषों को देनेवाली, चिरकाल तक एकमात्र दुःखरूप, क्षण-प्रतिक्षण में विचित्र दुःखरूप, असह्य, दुस्तर बड़ी-बड़ी आपत्तियाँ नष्ट हो गई हे ओर चैतन्यघन अद्वितीय पूणनिन्द आत्मा प्राप्त हो गया है, कारण कि प्रत्यगात्मा में अज्ञानजाङ्य ज्ञान से बाधित हो चुका है