Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 35, Verse 73
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 35, verse 73 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 35 · श्लोक 73
संस्कृत श्लोक
अस्नेहस्नेहदीपाय वृत्तिनिष्क्रान्तवर्तिने ।
स्वभावाधारधीराय चिद्दीपाय नमो नमः ॥ ७३ ॥
हिन्दी अर्थ
तेलरहित, परम प्रेम को उद्दीप्त
करनेवाले, वृत्ति द्वारा निष्क्रमणरूप वत्ती से युक्त सब वस्तुओं के स्वभाव के आधाररूप बुद्धिप्रकाशक
चैतन्यरूप दीपक को बार-बार नमस्कार है