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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 35, Verse 14

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 35, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 35 · श्लोक 14

संस्कृत श्लोक

आमोद इव पुष्पेषु तैलं तिलकणेष्विव । रसजातिष्विवास्वादो देवो देहेषु संस्थितः ॥ १४ ॥

हिन्दी अर्थ

कैसे यह देह में विद्यमान रहता है ? ऐसा प्रश्न होने पर कहते हैं। फूलों में सुगन्ध की तरह, तिलों में तेल की तरह और रसों में माधुर्य की तरह वह सब शरीरो में स्थित है