Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 35, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 35, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 35 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
नास्य संसेव्यमानस्य सर्वसंपत्तिशालिनः ।
धनानामीश्वरस्येव स्मयो गर्वो यथा भवेत् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे सेवित होने पर सर्वसम्पत्तिशाली धनी को अभिमान या गर्व हो सकता
है वैसे सेवन किये जा रहे सर्वसम्पत्तिशाली इसको तनिक भी मान या गर्व नहीं होता