Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 34, Verse 60
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 34, verse 60 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 60
संस्कृत श्लोक
अहो नु विततात्मास्मि न माम्यप्यात्मनात्मनि ।
कल्पान्तपवनाधूत एकार्णव इवार्णवे ॥ ६० ॥
हिन्दी अर्थ
अहो, मैं तो विस्तृत आत्मावाला हू, अतएव मैं अपने आप अपने आत्मा में, कोठिले में धानों की
भाँति, ऐसे नहीं समा रहा हूँ जैसे प्रलयकाल की घोर अंधी से उछलता हुआ प्रलय सागर पहले के सागर
के घेरे में नहीं समाता है