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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 34, Verse 59

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 34, verse 59 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 59

संस्कृत श्लोक

अपूर्वमनिबद्धेन्द्रमशस्त्रदलितामरम् । अप्रार्थितं मे संप्राप्तं जगद्राज्यमिदं ततम् ॥ ५९ ॥

हिन्दी अर्थ

इन्द्र से बढ कर राज्य की प्राप्ति हुए बिना आपकी सम्राटता कैसी ? ऐसी यदि कोई शंका करे, तो उस पर कहते हैँ । यह विस्तृत अपूर्वं जगद्राज्य, जिसमें इन्द्र का बन्धन नहीं किया गया ओर अस्त्र-शस्त्रों के द्वारा देवताओं का संहार नहीं किया गया, बिना प्रार्थना के मुझे प्राप्त हुआ है । इन्द्रराज्य की प्राप्ति के लिए बड़े कष्ट उठाने पडते हें शस्त्रास्त्रों द्वारा देवताओं का संहार करना पड़ता है तथा इन्द्र को बाँधना पड़ता हे । वह अपूर्व भी नहीं हे, अनेकों द्वारा उपभुक्त है, यह उससे विलक्षण होने से श्रेष्ठ है, यह भाव हे