Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 34, Verse 4
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 34, verse 4 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
इत्युक्त्वा दितिपुत्रेन्द्रं विष्णुरन्तरधीयत ।
कृतघर्घरनिर्ह्रादस्तरङ्गस्तोयधेरिव ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामचन्द्रजी, दैत्यराज प्रह्लाद से यह कहकर जैसे कलकल ध्वनि करके
समुद्र की लहर छिप जाती है वैसे ही भगवान् विष्णु अन्तर्हित हो गये