Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 34, Verse 3
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 34, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
श्रीभगवानुवाच ।
सर्वसंभ्रमसंशान्त्यै परमाय फलाय च ।
ब्रह्मविश्रान्तिपर्यन्तो विचारोऽस्तु तवानघ ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार प्रार्थना करने पर भगवान् विष्णु अपने विचार से उत्पन्न आत्मतत्व साक्षात्कार के बिना
आत्यन्तिक दुःखनिवृत्ति नहीं हो सकती, यह समझकर वर देते हैं।
श्रीभगवान् ने कहा : हे पापरहित, सब सन्देहों की निवृत्ति के लिए और मुक्तिरूपी सर्वोत्तम फल के
लिए तुम्हारा ब्रह्मसाक्षात्कार-पर्यन्त विचार हो