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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 34, Verse 38

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 34, verse 38 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 38

संस्कृत श्लोक

सर्वेषामविभिन्नोऽसौ त्रैलोक्योदरवर्तिनाम् । ब्रह्मादीनां तृणान्तानां चिदात्मा संप्रकाशकः ॥ ३८ ॥

हिन्दी अर्थ

इसी में कल्पना है, यह कैसे जाना ? ऐसी यदि कोई शंका करे, तो जगत्‌ की स्फूर्ति इससे भिन्न है, इससे जाना, ऐसा कहते हैं। त्रैलोक्य मध्यवर्ती ब्रह्मा से लेकर तिनके तक सब पदार्थो का प्रकाशक यह स्वयं ज्योति चिदात्मा सबसे भिन्न है