Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 34, Verses 39–40
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 34, verses 39–40 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 39,40
संस्कृत श्लोक
एकोऽसावहमाद्यन्तरहितः सर्वगाकृतिः ।
चराचराणां भूतानामन्तः स्वानुभवः स्थितः ॥ ३९ ॥
अस्य तस्य ममेमानि स्थावराणि चराणि च ।
परिसंख्यादिहीनानि शरीराणि बहूनि च ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
जन्म और विनाश रहित सर्वव्यापक यह एक मैं सब चराचर भूतो के अन्दर
स्वानुभवरूप स्थित हूँ। इस मेरे स्थावर ओर जंगम बहुत शरीर है, जिनकी संख्या गणना, काल की
सीमा ओर देश की सीमा नहीं हो सकती