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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 34, Verse 2

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 34, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

प्रह्लाद उवाच । सर्वसंकल्पफलद सर्वलोकान्तरस्थित । यदुदारतमं वेत्सि तदेवादिश मे विभो ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

प्रह्लाद ने कहा : हे प्रभो, आप सब संकल्पो का फल देनेवाले हैं और सब प्राणियों के हृदय में स्थित है, अतएव जिस वस्तु को आप सर्वोत्तम समझते हों, उसीको मुझे देने की कृपा कीजिये