Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 34, Verse 25
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 34, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
सातत्येनानुभूतानां सर्वेषां च जगत्स्थितौ ।
एतत्कारणमाद्यं तत्कारणं नास्य विद्यते ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
“आकाश
से वायु, वायु से अग्नि, अग्नि से जल' इत्यादि क्रम से श्रुति और प्रत्यक्ष द्वारा अनुभूत सब पदार्थो की
जगत् में उत्पत्ति आदि की व्यवस्था में सद्रूप से सब कार्यो में व्यक्त यही आदिकारण है, इसका कोई
कारण नहीं हे