Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 34, Verses 23–24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 34, verses 23–24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 23,24
संस्कृत श्लोक
असावेव हि भूतानां सर्वेषामेव जाग्रताम् ।
सर्वानुभविताभूमिरात्मा मुकुरवत्स्थितः ॥ २३ ॥
तस्यैकस्याविकल्पस्य चिद्दीपस्य प्रसादतः ।
उष्णोऽर्कः शिशिरश्चन्द्रो घनोऽद्रिर्विद्रुतं पयः ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे ग्रहण सब प्रतिबिम्बं का विश्रान्ति स्थान हे । उसी एक
विकल्परहित चिद्रूपी दीपक के प्रसाद से सूर्य गर्म, चन्द्रमा शीतल, पर्वत ठोस ओर जल तरल हे । भाव
यह है कि विभिन्न पदार्थो के विविध विचित्र स्वभावो की सिद्धि उसीके अधीन हे