Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 34, Verse 1
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 34, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीभगवानुवाच ।
वरं गुणनिधे दैत्यकुलचूडामहामणे ।
गृहाणाभिमतं भूयो जन्म दुःखोपशान्तये ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीभगवान ने कहा : हे देत्यकुल के चूडामणिरूप, हे गुणसागर, पुनः जन्म रूपी दुःख की निवृत्तिके
लिए तुम अभीष्ट वर माँगो
सर्ग सन्दर्भ
तेंतीसवाँ सर्ग समाप्त चौतीसवाँ सर्ग श्रीहरि के वर से सुविचार को प्राप्त कर तथा अनात्मवर्ग का त्याग कर प्रह्नाद का अपने अद्वितीय सच्चिदात्मस्वरूप का दर्शन ।