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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 33, Verse 26

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 33, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

त्रिभुवननलिनीसितारविन्दं तिमिरसमानविमोहदीपमग्र्यम् । स्फुटतरमजडं चिदात्मतत्त्वं जगदखिलार्तिहरं हरिं प्रपद्ये ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

त्रिभुवनरूपी कमलिनी के लिए सूर्यरूप, अन्धकार के सदृश आच्छादक अज्ञान के लिए श्रेष्ठ दीपरूप, नित्यस्वप्रकाश, अजड, चिदात्मतत्त्वरूप, जगत्‌ की सब पीडाओं को दूर करनेवाले भगवान्‌ की मैं शरण लेता हू