Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 33, Verse 25
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 33, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
दितिसुतनलिनीतुषारपातं सुरनलिनीसततोदितार्कबिम्बम् ।
कमलजनलिनीजलावपूरं हृदि नलिनीनिलयं विभुं प्रपद्ये ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
दैत्यरूपी नलिनी के लिए हिमपातरूप, देवरूपी नलिनी केलिए सदा उदित सूर्यमण्डलरूप,
ब्रह्मारूपी नलिनी के तड़ागरूप एवं हृदयकमल में निवास करनेवाले विष्णु की मैं शरण लेता हूँ