Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 33, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 33, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
नवविकसितपद्मरेणुगौरं स्फुटकमलावपुषा विभूषिताङ्गम् ।
दिनशमसमयारुणाङ्गरागं कनकनिभाम्बरसुन्दरं प्रपद्ये ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
ताजे
फूले हुए नाभिकमल के पराग से वक्षःस्थल में पीलेवर्णवाले, प्रकाशमान लक्ष्मी के शरीर से विभूषित
वामांगवाले, सायंकाल के समय के समान अरुण अंगरागवाले एवं सुवर्ण के समान चमकदार पीताम्बर
से सुन्दर भगवान् की शरण में मैं जाता हूँ