Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 30, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 30, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 30 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
पौरमासुरमुद्वान्तैददाहेक्षणवह्निभिः ।
स सर्वभूतकल्पान्ते जगज्जालमिवानलः ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे सब प्राणियों के प्रलय के अन्त में अग्नि सम्पूर्ण
जगतों को जला डालती है वैसे ही इस प्रकार के नरसिंह शरीर को धारण किये हुए भगवान ने निकल
रहीं नत्रअग्नियों से असुरो के नगर में रहनेवाले सब जीवों और सब सामग्री को जला दिया