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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 29, Verses 62–63

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 29, verses 62–63 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 29 · श्लोक 62,63

संस्कृत श्लोक

विकल्पांशविहीनस्य त्वयैषा चिद्विवस्वतः । गृहीता वितता व्याप्तिर्मदुक्त्या परमात्मनः ॥ ६२ ॥ विलीनसर्वसंकल्पः शान्तसंदेहविभ्रमः । क्षीणकौतुकनीहारो जातोऽसि विगतज्वरः ॥ ६३ ॥

हिन्दी अर्थ

विकल्प के अंश से रहित चैतन्यरूप सूर्य परमात्मा की यह विस्तृत व्याप्ति (देशतः, कालतः ओर वस्तुतः अपरिच्छिन्नता) मेरे उपदेश से ही आपको गृहीत हुई है । आपके सब संकल्प नष्ट हो गये हैं, सन्देह भ्रम शान्त हो गये हैँ, कोतुकरूपी तुषार हट गया हे, आप सन्तापशून्य हो गये हैँ