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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 29, Verse 61

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 29, verse 61 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 29 · श्लोक 61

संस्कृत श्लोक

त्वमात्मन्यात्मना राम प्रसादे समवस्थितः । प्राप्तोऽसि विततं बोधं मद्वचस्येव बुध्यसे ॥ ६१ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि कोई कहे, तब तो एकमात्र प्रत्यक्तत्त्वदृष्टि ही ज्ञान के लिए पर्याप्त हो, गुरु के उपदेश का क्या प्रयोजन है ? तो इस शंका पर कहते हैं। हे श्रीरामचन्दजी, आत्मा में अपने से ही स्थित हुए आप विस्तृत बोध को प्राप्त हुए हैं। मेरा उपदेश होने पर ही आपको बोध हुआ है