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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 29, Verse 60

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 29, verse 60 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 29 · श्लोक 60

संस्कृत श्लोक

वेदवेदान्तशास्त्रार्थतर्कदृष्टिभिरप्ययम् । नात्मा प्रकटतामेति यावन्न स्वमवेक्षितम् ॥ ६० ॥

हिन्दी अर्थ

वैराग्य, विचार, श्रवण आदि के रहते हुए भी बहिर्मुख दृष्टिवाले पुरुषों को ज्ञान नहीं होता, इसलिए आन्तरद्ष्टि भी आवश्यक है, इस आशय से कहते हैं। जब तक प्रत्यकृतत्त्व का दर्शन नहीं होता तब तक वेद-वेदान्त शास्त्रों के अर्थ और तर्को की दृष्टियों से भी यह आत्मा प्रकट नहीं होता