Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 29, Verses 58–59
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 29, verses 58–59 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 29 · श्लोक 58
संस्कृत श्लोक
त्वमेतदविवेकाब्भ्रमुदितं हृदयाम्बरे ।
विवेकपवनेनाशु दूरं नय महामते ॥ ५८ ॥
आत्मनैव प्रयत्नेन यावदात्मावलोकने ।
न कृतोऽनुग्रहस्तावन्न विचारोदयो भवेत् ॥ ५९ ॥
हिन्दी अर्थ
हे महामते, आप हृदयरूपी
आकाश में उदित हुए इस अविवेकरूपी मेघ को विवेकरूपी वायु से शीघ्र दूर कीजिये जब तक स्वयं
श्रवण, वैराग्य आदि पुरूष प्रयत्न से आत्मसाक्षात्कार में यत्न नहीं किया जाता, तब तक विचारोदय
नहीं होता