Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 24, Verse 25
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 24, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 24 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
पुरुषार्थादृते पुत्र नेह संप्राप्यते शुभम् ।
क्रियाफलं परिप्राप्तुं हर्षामर्षविवर्जितम् ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
वैराग्य की दृढ़ता में हर्ष, क्रोध, चंचलता आदि की प्राप्ति का निवारण करनेवाली पौरुष दढता
आवश्यक है, इस आशय से कहते हैं।
हे पुत्र, पुरुषार्थ के सिवाय हर्ष क्रोध से रहित क्रियाफल को प्राप्त करने के लिए अनुकूल शुभ
साधन यहाँ पर प्राप्त नहीं होता