Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, Verse 95
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, verse 95 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 95
संस्कृत श्लोक
चित्स्पन्दयोरेकतायां किं नाम मन उच्यते ।
का सेना हयमातङ्गसङ्गसंघट्टनं विना ॥ ९५ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार चित् और स्पन्द के भेद पक्ष मे मन की अलीकता कह कर अभेद पक्ष में तो वह सुतरां
अलीक है, ऐसा कहते है ।
चित् ओर स्पन्द का अभेद होने पर तो मन नाम की वस्तु की सम्भावना ही क्या है ? भला बताइये,
हाथी, घोड़े के सम्मर्द के बिना सेना ही क्या हुई ?