Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, Verse 96
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, verse 96 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 96
संस्कृत श्लोक
तस्मान्नास्त्येव दुष्टात्म चित्तं राम जगत्त्रये ।
सैषा सम्यक्परिज्ञानाच्चेतसो जायते क्षतिः ॥ ९६ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए हे श्रीरामचन्द्रजी, दोनों पक्षो में मन
का सम्भव न होने से तीनों जगतों में दुष्टात्मा मन हे ही नहीं । ऐसे निश्चय से ही मनोनाश होता है