Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, Verse 76
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, verse 76 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 76
संस्कृत श्लोक
आत्मैवेदं जगत्सर्वमात्मा कालक्रमस्तथा ।
स चाकाशादच्छतरो नास्तीवास्त्येव चामलः ॥ ७६ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि आत्मा ही है, तो वह क्यो नहीं प्रतीत होता अथवा जगद्रूप से कौन प्रतीत होता है ? ऐसी शंका
होने पर कहते हैं।
आत्मा ही यह सम्पूर्णं जगत है और आत्मा ही कालक्रम है। आकाश से सूक्ष्म होने के कारण नहीं-
सा प्रतीत हो रहा वह निर्मल ही है