Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, Verse 51
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, verse 51 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 51
संस्कृत श्लोक
चित्स्वभावपरामृष्टा स्पन्दशक्तिरसन्मयी ।
कल्पना चित्तमित्युक्त्या कथ्यते शास्त्रदृष्टिभिः ॥ ५१ ॥
हिन्दी अर्थ
अतएव चित् में स्पन्दन कल्पना है, वही मन है, ऐसा विद्वानों का प्रतिवाद है यह कहते है ।
यह शारत्रज्ञ लोग चित्स्वभाव से सम्बद्ध असन्मय स्पन्दशक्तिरूप कल्पना को चित्त शब्द से
कहते हैं