Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, Verse 50
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, verse 50 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 50
संस्कृत श्लोक
जडं यत्किल निर्हीनं चिता दीपिकयौजसा ।
तन्मनः शवसंकाशमचिदुत्तिष्ठते कथम् ॥ ५० ॥
हिन्दी अर्थ
मन की प्रकाशशक्ति के समान स्पन्दनशक्ति भी चित् के अधीन है, ऐसा कहते है ।
जो जड़ मन शव के तुल्य अचेतन है, वह चिद्रूप दीपिका के बल के बिना कैसे चेष्टा कर सकता
हे ?